रायपुर डेस्क। दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। ओमान के तट के पास एक कार्गो जहाज पर ड्रोन हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र ने अपना रेस्क्यू ऑपरेशन फिलहाल रोक दिया है। इस फैसले के बाद करीब 11 हजार नाविक बीच समुद्र में फंस गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, UN और ओमान मिलकर उन जहाजों को सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रहे थे जो युद्ध और सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण फारस की खाड़ी में अटके हुए थे। इसी दौरान सिंगापुर के झंडे वाले कार्गो शिप ‘एवर लवली’ पर ड्रोन हमला हो गया, जिसके बाद पूरा मिशन रोक दिया गया।
UN की समुद्री एजेंसी IMO ने साफ कर दिया है कि जब तक जहाजों की सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती, तब तक निकासी अभियान दोबारा शुरू नहीं होगा। दूसरी ओर ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका था कि उसकी मंजूरी के बिना कोई भी जहाज नए समुद्री कॉरिडोर का इस्तेमाल न करे।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि दुनिया के करीब 20 फीसदी कच्चे तेल की सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। अगर तनाव लंबा खिंचता है तो भारत समेत कई देशों में तेल और गैस की कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है।
अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि ईरान, ओमान और संयुक्त राष्ट्र के बीच कोई सहमति बनती है या नहीं, क्योंकि हजारों नाविकों की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा बाजार दोनों दांव पर लगे हैं।
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