रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्वभर में नई पहचान दिलाने वाली प्रख्यात पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई अब हमारे बीच नहीं रहीं। रविवार तड़के सुबह करीब 3:15 बजे उन्होंने रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से अस्वस्थ थीं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा था।
डॉ. तीजन बाई ने अपनी बुलंद आवाज, दमदार अभिनय और अनूठी कथावाचन शैली से पंडवानी को गांव-देहात की लोक परंपरा से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। महाभारत की कथाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने की उनकी कला ने उन्हें भारतीय लोक संस्कृति की सबसे सम्मानित हस्तियों में शामिल कर दिया। उन्होंने दुनिया के अनेक देशों में अपनी प्रस्तुतियों से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत का परचम लहराया।
भारतीय लोक कला में उनके अद्वितीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। उनके निधन से कला, साहित्य और संस्कृति जगत में गहरा शोक व्याप्त है। छत्तीसगढ़ ने अपनी ऐसी सांस्कृतिक धरोहर खो दी है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जताया शोक
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनका जाना छत्तीसगढ़ और पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने अपने असाधारण पंडवानी गायन से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्व मंच पर प्रतिष्ठित किया। उनकी कला, संघर्ष और समर्पण सदैव आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना करते हुए शोकाकुल परिजनों, शुभचिंतकों और उनके करोड़ों प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
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