चीनी की बढ़ती कीमतों पर केंद्र का बड़ा फैसला, कच्ची चीनी के आयात नियम बदले

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नई दिल्ली। देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने कच्ची चीनी के आयात से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत आयात होने वाली कच्ची चीनी को अब किसी एक निश्चित अंतिम तारीख तक बाजार में उतारने की बाध्यता नहीं होगी। इसके बजाय प्रत्येक खेप के लिए अलग समयसीमा निर्धारित की गई है। आयातक को बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने की तारीख से दो महीने के भीतर कच्ची चीनी को रिफाइन कर सफेद चीनी के रूप में घरेलू बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध कराना होगा।

सरकार ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है, जब देशभर में चीनी की खुदरा कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है। महज एक महीने के दौरान चीनी के दाम करीब 15.6 फीसदी तक बढ़ गए हैं।

नई व्यवस्था के तहत TRQ के माध्यम से आयात की गई कच्ची चीनी की प्रत्येक खेप के लिए बिल ऑफ एंट्री की तारीख से दो महीने की समयसीमा लागू होगी। इससे पहले आयातित कच्ची चीनी को रिफाइन कर घरेलू बाजार में बेचने के लिए 31 अक्टूबर 2026 की एक समान अंतिम तारीख निर्धारित थी।

सरकार ने कुल 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के TRQ आयात से जुड़े नियमों में यह बदलाव किया है। अब आयातक को संबंधित खेप को तय दो महीने के भीतर रिफाइन कर सफेद चीनी के रूप में घरेलू बाजार में उतारना होगा।

चीनी की कीमतों में तेजी का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 20 जुलाई को चीनी की औसत खुदरा कीमत 48.18 रुपये प्रति किलो थी। 20 अगस्त तक यह बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गई।

इस तरह एक महीने में चीनी के दाम में 7.52 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। प्रतिशत के लिहाज से यह करीब 15.6 फीसदी की वृद्धि है। कीमतों में इस उछाल से घरेलू बजट पर भी दबाव बढ़ा है।

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी चीनी की कीमतों और उत्पादन को लेकर चिंता जताई है। उनके मुताबिक अल नीनो परिस्थितियों का असर गन्ने की फसल पर पड़ा है। इसका प्रभाव भारत के साथ-साथ दुनिया के अन्य हिस्सों में कृषि उत्पादन और विशेष रूप से चीनी उत्पादन पर भी पड़ा है।

मंत्री के अनुसार, भारत में सालाना चीनी की जरूरत करीब 280 लाख टन है। वहीं, देश में फिलहाल 20 से 25 लाख टन से अधिक अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध है।

सरकार की नई व्यवस्था का मकसद TRQ के तहत आयात की गई कच्ची चीनी को लंबे समय तक स्टॉक में रखने के बजाय तय अवधि के भीतर रिफाइन कर घरेलू बाजार में उपलब्ध कराना है। प्रत्येक खेप के लिए दो महीने की समयसीमा तय होने से आयातित कच्ची चीनी की बाजार में आपूर्ति को समयबद्ध करने की कोशिश की गई है।

हालांकि, इस बदलाव से खुदरा कीमतों पर कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले दिनों में चीनी की आपूर्ति, घरेलू उत्पादन और बाजार की मांग पर निर्भर करेगा। फिलहाल सरकार के सामने कीमतों को नियंत्रित रखने के साथ पर्याप्त घरेलू स्टॉक बनाए रखने की चुनौती बनी हुई है।

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