Red Line In Medicine: आज के समय में हम में से ज्यादातर लोग शरीर में हल्की-सी परेशानी होते ही खुद ही डॉक्टर बन जाते हैं. सिर दर्द हो, बुखार आए या पेट में दिक्कत हो, तो सीधे केमिस्ट की दुकान से पेनकिलर या एंटीबायोटिक ले लेना आम आदत बन चुकी है. लेकिन यह आदत धीरे-धीरे आपकी सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती है. खासकर तब, जब दवा के डिब्बे पर बनी लाल रंग की सीधी रेखा को हम नजरअंदाज कर देते हैं.
दवा पर बनी लाल लाइन का असली मतलब
दवाओं के पैकेट पर बनी लाल लाइन कोई डिजाइन नहीं होती, बल्कि यह एक चेतावनी होती है. इसका साफ मतलब है कि यह दवा केवल डॉक्टर की पर्ची पर ही ली जानी चाहिए. ऐसी दवाओं में ज्यादातर एंटीबायोटिक्स, स्ट्रॉन्ग पेनकिलर्स और कुछ खास मेडिसिन शामिल होती हैं. बिना सलाह इनका सेवन करने से बीमारी ठीक होने के बजाय और बिगड़ सकती है.
Antibiotics कैसे बन जाती हैं जानलेवा?
एंटीबायोटिक्स का काम शरीर में मौजूद बैक्टीरिया को खत्म करना होता है. लेकिन जब इन्हें बिना डॉक्टर की सलाह लिया जाता है या बीच में ही कोर्स छोड़ दिया जाता है, तो बैक्टीरिया इन दवाओं के खिलाफ मजबूत हो जाते हैं. इस कंडीशन को Antibiotic Resistance कहा जाता है. इसका मतलब यह है कि भविष्य में वही दवाएं गंभीर इंफेक्शन में भी असर नहीं करतीं. नतीजा यह होता है कि एक मामूली इंफेक्शन भी जानलेवा बन सकता है.
हर दवा हर शरीर के लिए नहीं होती
लाल लाइन यह भी समझाती है कि हर दवा हर व्यक्ति के लिए सेफ नहीं होती. उम्र, वजन, बीमारी की गंभीरता और पहले से चल रही दवाओं को देखकर ही डॉक्टर सही मेडिसिन और उसकी डोज तय करते हैं. खुद से दवा लेने से लिवर, किडनी और डाइजेस्टिव सिस्टम पर बुरा असर पड़ सकता है. कई बार दवा बीमारी को दबा देती है, जिससे असली समस्या समय पर पकड़ में नहीं आती.
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