CRPF के 87वें स्थापना दिवस पर फिर दोहराई गई 31 मार्च तक नक्सलवाद खत्म करने की डेडलाइन

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गुवाहाटी: गुवाहाटी में आयोजित Central Reserve Police Force (सीआरपीएफ) के 87वें स्थापना दिवस परेड समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने देश की आंतरिक सुरक्षा में अर्धसैनिक बल की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ ने पिछले कई दशकों में आतंकवाद, नक्सलवाद और अलगाववाद जैसी चुनौतियों का डटकर सामना किया है और राष्ट्र की एकता व अखंडता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

गृह मंत्री ने 2200 से अधिक शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका बलिदान देश कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने कहा कि देश की शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले जवानों का साहस और समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। शाह ने कहा कि लगभग 11-12 वर्ष पहले देश के तीन प्रमुख अशांत क्षेत्र—पूर्वोत्तर, नक्सल प्रभावित इलाके और जम्मू-कश्मीर—लगातार हिंसा और अस्थिरता से जूझ रहे थे। उस समय बम धमाकों और गोलीबारी की घटनाएं आम थीं, जिससे आम नागरिकों का जीवन प्रभावित होता था।

उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में 700 से अधिक जवानों ने, नक्सल प्रभावित इलाकों में 736 जवानों ने और जम्मू-कश्मीर में करीब 500 जवानों ने देश की सुरक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। इसके अतिरिक्त देश के अन्य हिस्सों में भी लगभग 250 जवानों ने अपनी जान गंवाई। गृह मंत्री ने कहा कि सुरक्षा बलों की दृढ़ता, रणनीतिक कार्रवाई और केंद्र सरकार की स्पष्ट नीति के कारण आज इन क्षेत्रों में स्थिति काफी हद तक शांतिपूर्ण और नियंत्रण में है।

अमित शाह ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार 31 मार्च 2026 तक देश को माओवाद की समस्या से पूरी तरह मुक्त कर देगी। उन्होंने कहा कि एक समय देश के 12 राज्यों और कई जिलों में माओवाद का गहरा प्रभाव था, लेकिन अब सुरक्षा अभियानों और विकास कार्यों के संयुक्त प्रयास से इसका दायरा तेजी से सिमटा है। उन्होंने इसे सुरक्षा बलों की ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि इतनी जटिल और लंबे समय से चली आ रही समस्या को कुछ ही वर्षों में नियंत्रित करना आसान नहीं था।

समारोह के दौरान परेड में सीआरपीएफ जवानों ने अनुशासन और साहस का प्रदर्शन किया। गृह मंत्री ने बल के अधिकारियों और जवानों को भविष्य में भी इसी समर्पण के साथ देश सेवा के लिए प्रेरित किया और कहा कि राष्ट्र उनकी बहादुरी और त्याग का सदैव ऋणी रहेगा।

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