1950 पूर्व दस्तावेज की अनिवार्यता खत्म करने की मांग तेज, संघर्ष मोर्चा की अध्यक्ष सावित्री जगत ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

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रायपुर।  जाति प्रमाण पत्र बनाओ संघर्ष मोर्चा की अध्यक्ष सावित्री जगत ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर अनुसूचित जाति एवं जनजाति के जाति प्रमाण-पत्र जारी करने संबंधी भारत सरकार के दिशा-निर्देशों का तत्काल पालन सुनिश्चित करने की मांग की है।उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा पत्र क्रमांक RL-12017/3/2024-RL Cell, दिनांक 10 जून 2025 के माध्यम से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन निर्देशों में कहा गया है कि राज्य पुनर्गठन की निर्धारण तिथि पर जो व्यक्ति संबंधित उत्तराधिकारी राज्य के स्थायी निवासी थे और जिनकी जाति राज्य की अधिसूचित सूची में शामिल है, वे अनुसूचित जाति/जनजाति प्रमाण-पत्र के पात्र होंगे। इसके लिए वर्ष 1950 के पूर्व के राजस्व दस्तावेज की अनिवार्यता नहीं होगी।

सावित्री जगत ने बताया कि लंबे समय से यह मांग उठाई जा रही थी कि अविभाजित मध्यप्रदेश की सूची में शामिल जातियों के लोगों को केवल पुराने राजस्व अभिलेखों के अभाव में प्रमाण-पत्र से वंचित न किया जाए। इस संबंध में प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, राष्ट्रीय एवं राज्य अनुसूचित जाति आयोग सहित विभिन्न मंचों पर ज्ञापन दिए गए थे।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि मध्यप्रदेश एवं उत्तराखंड उच्च न्यायालय के फैसलों के आधार पर केंद्र सरकार ने यह दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिससे पुनर्गठन तिथि को आधार मानकर नए राज्यों में पात्रता तय की जा सके।

मोर्चा की ओर से मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि:

राज्य में उक्त केंद्रीय पत्र का तत्काल प्रभाव से पालन सुनिश्चित किया जाए।

सभी जिला कलेक्टरों एवं संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं।

पूर्व में निरस्त या लंबित प्रकरणों की पुनः समीक्षा नई व्यवस्था के तहत की जाए।

सावित्री जगत ने कहा कि यदि इन निर्देशों का पालन किया जाता है तो हजारों परिवारों को उनके संवैधानिक अधिकार प्राप्त हो सकेंगे। उन्होंने सरकार से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपेक्षा जताई है।

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