मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 23 मार्च 2026 का दिन बैंकिंग सेक्टर के लिए ब्लैक मंडे साबित हुआ। बाजार खुलते ही बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली शुरू हो गई, जिससे बैंक निफ्टी (Bank Nifty) इंडेक्स दोपहर तक 3.2% (करीब 1600 अंक) टूटकर 51,968 के स्तर पर आ गया। इस गिरावट ने निजी और सरकारी दोनों तरह के बैंकों के निवेशकों को तगड़ा झटका दिया है।
बैंकिंग सेक्टर में गिरावट का सबसे बड़ा केंद्र देश का सबसे बड़ा प्राइवेट ऋणदाता, HDFC बैंक रहा। पिछले हफ्ते बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों (Values and Ethics) में मतभेद का हवाला देते हुए अचानक इस्तीफा दे दिया। इस इस्तीफे के बाद आज चौथे कारोबारी सत्र में भी शेयर करीब 4-5% टूटकर अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर (₹745 के करीब) पर पहुंच गए। महज चार दिनों में HDFC बैंक का मार्केट कैप लगभग 1.35 लाख करोड़ रुपये साफ हो गया है।
सरकारी बैंकों (PSU Banks) का हाल
गिरावट केवल प्राइवेट बैंकों तक सीमित नहीं रही। सरकारी बैंकों के इंडेक्स ‘निफ्टी पीएसयू बैंक’ में भी करीब 3% की गिरावट दर्ज की गई। यूनियन बैंक, केनरा बैंक और PNB के शेयर 4% से ज्यादा टूटे। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का शेयर भी करीब 3.1% गिरकर ₹1,014 के स्तर पर आ गया।
बैंकिंग सेक्टर पर दबाव की 3 बड़ी वजहें
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, बैंकिंग शेयरों के पिटने के पीछे ये प्रमुख कारण हैं। मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड $112 प्रति बैरल के पार निकल गया है। तेल महंगा होने से मुद्रास्फीति (Inflation) बढ़ती है, जिससे आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें खत्म हो गई हैं। यह बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) के लिए बुरा संकेत है। विदेशी निवेशकों ने मार्च महीने में अब तक भारतीय बाजार से ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा निकाल लिए हैं। चूंकि बैंकिंग शेयरों में FIIs की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा होती है, इसलिए सबसे ज्यादा बिकवाली इसी सेक्टर में दिख रही है।
सरकारी बैंकों (PSU Banks) का हाल
गिरावट केवल प्राइवेट बैंकों तक सीमित नहीं रही। सरकारी बैंकों के इंडेक्स ‘निफ्टी पीएसयू बैंक’ में भी करीब 3% की गिरावट दर्ज की गई। यूनियन बैंक, केनरा बैंक और PNB के शेयर 4% से ज्यादा टूटे। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का शेयर भी करीब 3.1% गिरकर ₹1,014 के स्तर पर आ गया।
बैंकिंग सेक्टर पर दबाव की 3 बड़ी वजहें
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, बैंकिंग शेयरों के पिटने के पीछे ये प्रमुख कारण हैं। मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड $112 प्रति बैरल के पार निकल गया है। तेल महंगा होने से मुद्रास्फीति (Inflation) बढ़ती है, जिससे आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें खत्म हो गई हैं। यह बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) के लिए बुरा संकेत है। विदेशी निवेशकों ने मार्च महीने में अब तक भारतीय बाजार से ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा निकाल लिए हैं। चूंकि बैंकिंग शेयरों में FIIs की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा होती है, इसलिए सबसे ज्यादा बिकवाली इसी सेक्टर में दिख रही है
क्रेडिट सुइस बॉन्ड विवाद
रिपोर्ट्स के अनुसार, HDFC बैंक द्वारा दुबई में ‘क्रेडिट सुइस’ के जोखिम भरे बॉन्ड्स की गलत तरीके से बिक्री (Mis-selling) के आरोपों और उसके बाद तीन वरिष्ठ अधिकारियों की बर्खास्तगी ने भी निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है।
आगे क्या?
दरअसल, बैंकिंग सेक्टर को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक HDFC बैंक में नेतृत्व को लेकर स्थिरता नहीं आती और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें शांत नहीं होतीं, तब तक बैंकिंग शेयरों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।
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