रायपुर– पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय परिसर में चल रहे खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के भारोत्तोलन इवेंट ने दर्शकों को रोमांच से भर दिया। 27 मार्च को सीनियर वर्ग की तीन स्पर्धाओं में पूर्वाेत्तर राज्यों के खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदकों पर कब्जा जमाया, जबकि छत्तीसगढ़ समेत अन्य टीमों ने कड़ी चुनौती दी। देशभर से आई आदिवासी प्रतिभाओं ने ताकत के साथ कुश्ती के दांव-पेच और तकनीक का अनुपम प्रदर्शन कर सभी को प्रभावित किया।
पुरुष 79 किग्रा वर्ग में अरुणाचल प्रदेश के रिचिन चोंग्रुजू ने स्नैच में 120 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 149 किग्रा के साथ कुल 269 किग्रा उठाकर स्वर्ण पदक जीता। मिजोरम के लालफाकवमा ने 265 किग्रा (स्नैच 119, क्लीन एंड जर्क 146) से रजत और जैकब वानलालतुआंगा ने 250 किग्रा से कांस्य हासिल किया। ओडिशा के के. सिमांचल चौथे, अरुणाचल के निया डोडुम पांचवें तथा जम्मू-कश्मीर के सोहैल अब्बास छठे स्थान पर रहे। मेघालय, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश के खिलाड़ियों ने भी उम्दा प्रदर्शन किया।

महिला 63 किग्रा में ओडिशा की बिदु स्मिता भोई ने कुल 195 किग्रा के दमदार लिफ्ट से स्वर्ण जीता। अरुणाचल की बोनी मांक्ख्या 193 किग्रा से रजत पर रहीं, जबकि असम की दुंखम सेंग तुरुंग ने 161 किग्रा से कांस्य लिया। असम की रूमे मेच 145 किग्रा से चौथी, अंडमान- निकोबार की तान्याशा 140 किग्रा से पांचवीं तथा छत्तीसगढ़ की हेमा मांडवी 132 किग्रा से छठी रहीं। ओडिशा की करमप्रिय मुरमु (125), त्रिपुरा की ममानी मोग (105), मध्यप्रदेश की शीला डामोर (88) और अरुणाचल की बोम्पी बागरा (85) ने सातवें से दसवें स्थान हासिल किए।

पुरुष 71 किग्रा वर्ग में मिजोरम के सिल्वन बेह्रोथाटलो ने कुल 281 किग्रा उठाकर स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। कर्नाटक के मंजूनाथ मराठी ने 270 किग्रा से रजत तथा अरुणाचल के तायर रोनिक ने 255 किग्रा से कांस्य जीता। झारखंड के हर्षित बागे, असम के मानस ज्योति और केरल के श्रीकुट्टनकुट्टन भी प्रभावशाली रहे।
महिला 58 किग्रा में अरुणाचल की अनाई वांग्सू ने स्नैच 74 किग्रा और क्लीन एंड जर्क 95 किग्रा के साथ 169 किग्रा कुल वजन से स्वर्ण जीता। ओडिशा की मिना सांता ने 165 किग्रा से रजत तथा मीना सिंह ने 161 किग्रा से कांस्य हासिल किया। असम की मार्टिना मिली, तारा सोनवाल और आंध्र की जी. लेनिन एस प्रिया ने भी कड़ी टक्कर दी।
यह आयोजन आदिवासी युवाओं को राष्ट्रीय मंच दे रहा है, जो खेल विकास और छत्तीसगढ़ को खेल-पर्यटन हब बनाने में मील का पत्थर साबित हो रहा। ऐसे इवेंट राज्य की खेल बुनियादी ढांचे को मजबूत करेंगे और उभरती प्रतिभाएं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर चमकेंगी।
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