पांडुलिपियाँ हमारी विरासत, संरक्षण में जनभागीदारी जरूरी: मुख्यमंत्री साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों से छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण के लिए आगे आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पांडुलिपियाँ हमारी पहचान और गौरव का प्रतीक हैं, जिन्हें सुरक्षित रखना और भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया गया ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान इस दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल है। इस अभियान के माध्यम से देशभर में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर उन्हें संरक्षित करने और डिजिटल माध्यम से सुलभ बनाने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि यदि उनके पास ताड़पत्र, हस्तलिखित ग्रंथ या अन्य प्राचीन दस्तावेज हैं, तो वे ज्ञानभारतम मोबाइल एप पर उनकी जानकारी दर्ज कर इस अभियान का हिस्सा बनें।

उन्होंने विश्वास जताया कि जनभागीदारी से छत्तीसगढ़ की ज्ञान परंपरा को नई पहचान मिलेगी और यह धरोहर सुरक्षित रूप से आने वाली पीढ़ियों तक पहुँच सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल युग में इन पांडुलिपियों का संरक्षण न केवल हमारी संस्कृति को मजबूत करेगा, बल्कि शोध और शिक्षा के नए द्वार भी खोलेगा।

राज्य में इस अभियान को गति देने के लिए 33 में से 26 जिलों में जिला स्तरीय समितियों का गठन किया जा चुका है और नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। शेष जिलों में भी प्रक्रिया जारी है। जिला स्तर पर सर्वेक्षण, प्रशिक्षण और संग्रहकर्ताओं की पहचान का कार्य तेजी से चल रहा है।

अब तक छत्तीसगढ़ में 4191 पांडुलिपियों का सर्वेक्षण किया जा चुका है, जबकि 6 जिलों में कार्य प्रारंभ हो चुका है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों को संजोते हुए इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएँ और ज्ञान की इस अमूल्य विरासत को संरक्षित करने में योगदान दें।

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