रायपुर। बेटियों की मुस्कान में ही भविष्य की सबसे उजली तस्वीर बसती है-और इसी मुस्कान को सुरक्षित रखने के संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ ने एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण कार्यक्रम की शुरुआत की है। यह पहल केवल एक शासकीय योजना नहीं, बल्कि हर उस माँ-बाप के विश्वास की रक्षा है, जो अपनी बेटी के बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित कल का सपना देखते हैं।
भारत सरकार के नेतृत्व में चल रहे अभियान से जुड़ते हुए छत्तीसगढ़ अब उन सभी राज्यों के साथ कदम से कदम मिला रहा है, जिन्होंने गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर को जड़ से समाप्त करने का बीड़ा उठाया है। गर्भाशय ग्रीवा कैंसर महिलाओ में होने वाले कैंसरों में दूसरा सबसे सामान्य कैंसर है। यह मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण के कारण होता है, गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के प्रारंभिक चरण में सामान्यतः कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देता जिस कारण अक्सर यह गंभीर अवस्था में पहुँच जाता है। HPV टीकाकरण इस गंभीर कैंसर के खिलाफ एक सशक्त और भरोसेमंद सुरक्षा कवच के रूप में स्थापित हो चुकी है- वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित, पूर्णतः सुरक्षित, अत्यंत प्रभावी है और इसकी सुरक्षा को लेकर कोई गंभीर प्रतिकूल प्रभाव दर्ज नहीं हुआ है-जो इसकी विश्वसनीयता को और भी पुख्ता बनाता है। यह टीका केवल आज की सुरक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में कैंसर के खतरे को जड़ से कम करने की ठोस और दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान करता है।
निजी अस्पतालों में एचपीवी टीके की एक खुराक की कीमत लगभग ₹4,000 तक होती है, जो अनेक परिवारों के लिए वहन करना आसान नहीं है। ऐसे में आर्थिक बाधाएँ अक्सर बेटियों की इस जरूरी सुरक्षा में रुकावट बन जाती हैं। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने स्पष्ट और संवेदनशील रुख अपनाया है। सरकार का दृढ़ संकल्प है कि कोई भी बेटी केवल आर्थिक कारणों से इस जीवनरक्षक टीके से वंचित न रहे, और इसी उद्देश्य से पात्र किशोरियों को यह टीका पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। यह टीकाकरण राज्य के सभी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों, जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में उपलब्ध है तथा शीघ्र ही यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी उपलब्ध होगा। प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों और यू विन डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए हर लाभार्थी तक इस सेवा की पारदर्शी और प्रभावी पहुँच सुनिश्चित की गई है। स्वास्थ्य विभाग सभी अभिभावकों और जागरूक नागरिकों से अपील करता है कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं। यह केवल एक टीकाकरण नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है-अपनी बेटियों को एक ऐसे खतरे से बचाने की, जिसे रोका जा सकता है।
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