बिलासपुर. राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर बिलासपुर जिले ने ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए 50,044 परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराए हैं. यह उपलब्धि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), पीएम जन मन योजना एवं मुख्यमंत्री आवास योजना के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है, जिसके माध्यम से जिले के हजारों जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित व सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत मिली है.
हितग्राहियों के खाते में पहुंची 781.13 करोड़ राशि
जिला प्रशासन द्वारा योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई. कुल 781.13 करोड़ रुपये की राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की गई, जिससे बिचैलियों की भूमिका समाप्त हुई और कार्यों में तेजी आई.
क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो मस्तूरी विकासखंड 14,973 आवासों के साथ जिले में शीर्ष पर रहा. इसके बाद बिल्हा में 13,762, कोटा में 11,205 और तखतपुर में 10,104 आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया. यह आंकड़े न केवल प्रशासनिक दक्षता को दर्शाते हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को भी साबित करते हैं.
‘नारी शक्ति’ की महत्वपूर्ण भूमिका
इस सफलता के पीछे ‘नारी शक्ति’ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. जिले में 113 महिलाओं को ‘रानी मिस्त्री’ के रूप में प्रशिक्षित कर उन्हें निर्माण कार्य में सक्रिय भागीदारी दी गई, जिससे वे आत्मनिर्भर बनीं. वहीं 331 महिलाओं को ‘डीलर दीदी’ बनाकर निर्माण सामग्री की आपूर्ति की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिससे स्थानीय स्तर पर संसाधनों की उपलब्धता बढ़ी. इसके अलावा 2,231 महिलाओं को शटरिंग सामग्री किराये पर उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिससे निर्माण कार्यों में तेजी आई और महिलाओं की आय के नए स्रोत विकसित हुए.
छत्तीसगढ़ में हासिल किया दूसरा स्थान
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत वर्ष 2016-17 से 2025-26 तक जिले ने कुल 1,03,873 आवास पूर्ण कर छत्तीसगढ़ में दूसरा स्थान प्राप्त किया है. यह उपलब्धि जिले की मजबूत कार्ययोजना, सतत मॉनिटरिंग और जनसहभागिता का परिणाम है.
इस योजना का मानवीय पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है. ग्राम डारसागर की झांगली बैगा और ग्राम नेवसा की कैलाशा बाई जैसी हितग्राही, जो वर्षों से कच्चे मकान में कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रही थीं, आज पक्के घर में सुरक्षित और सम्मानपूर्वक जीवन जी रही हैं. उनके लिए यह केवल एक मकान नहीं, बल्कि सुरक्षा, आत्मसम्मान और बेहतर भविष्य का प्रतीक है.
कलेक्टर संजय कुमार अग्रवाल ने इस उपलब्धि को जिले के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए कहा कि ये 50,000 से अधिक घर केवल ईंट और सीमेंट की संरचनाएं नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के सम्मान और सुरक्षा की नींव हैं. वहीं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप कुमार अग्रवाल ने कहा कि भविष्य में भी पारदर्शिता और प्रतिबद्धता के साथ प्रत्येक पात्र हितग्राही तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता रहेगी.
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