रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने साफ संदेश दे दिया है, बिना चार्जशीट और विभागीय जांच के किसी कर्मचारी को सजा नहीं दी जा सकती। बिलासपुर में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक पुलिस इंस्पेक्टर की वेतन वृद्धि रोकने के आदेश को ही रद्द कर
मामला कोरबा के इंस्पेक्टर के.के. पांडेय का था, जिन पर समन वारंट तामील करने में लापरवाही का आरोप लगा था। एसपी ने सिर्फ नोटिस देकर एक साल की वेतन वृद्धि रोक दी, लेकिन कोर्ट ने इसे सीधा कानून के खिलाफ मान लिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि अगर कर्मचारी आरोपों से इनकार करता है, तो पहले चार्जशीट देना और पूरी विभागीय जांच करना जरूरी है। बिना इस प्रक्रिया के सजा देना नियमों का उल्लंघन है।
इस फैसले के बाद साफ हो गया है कि अब विभाग सीधे सजा नहीं दे सकते, पूरी प्रक्रिया फॉलो करनी ही होगी।
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