रायपुर : छत्तीसगढ़ में बीजेपी प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी के दस्तक़ देते ही,राजनैतिक गलियारों का नज़ारा देखते ही बन रहा है,खासकर बीजेपी मुख्यालय से आ रही,तस्वीरों और वीडियो को देखकर अंदाज़ा लगाया जा सकता है,कि "सरकार जमीन" पर आ गई है | ऐसे दृश्य देखकर आम जनता भी हैरत में है | हालाँकि,कुछ जमीनी स्तर के ज़रूरी कामकाज़ के संपन्न होने के बाद ही ''माननीयों'' को "कुर्सी" में बैठने का मौका मिला |
दरअसल,अभी तक प्रदेश में राजनेताओं के पैर ज़मीन पर ''यदा-कदा'' ही दिखाई देते थे,लेकिन स्मृति ईरानी के आने के बाद संगठन -पार्टी पदाधिकारी ही नहीं,बल्कि "सरकार" भी पालती मार कर "जमीन'' से चिपके नज़र आई | ''राजा हो या रंक'' एक ही झटके में अपने-अपने लिए मुकम्मल जगह तलाशते दिखाई दिए | राज्य में बीजेपी के सत्ता संभालने के बाद यह पहला मौका है,जब राजनेता आसमान से ज्यादा,जमीन पर अपनी आपबीती प्रदेश प्रभारी को सुनाते रहे |
आमतौर पर संगठन के पदाधिकारियों,विधायकों समेत मंत्रियों को साज-सज्जा युक्त मंच पर,कभी सोफ़ा,तो कभी महाराजा कुर्सी में आसान जमाएं आपने देखा ही होगा,जन-सभाओं में आम कार्यकर्ताओं को भी कुर्सी में काबिज़ देख कर आपको सब कुछ सामान्य ही नज़र आता होगा ? लेकिन,रायपुर में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद पहली बार पूरी की पूरी सरकार जमींदार की तर्ज पर जमीन पर बैठे दिखाई दी | बीजेपी कार्यालय का इस अद्भुत नज़ारा लोगों की जुबान पर है,जिसने भी इस दृश्य को देखा,उनके मुंह से "वाह-वाह" और हाथों से "तालियों की गड़गड़ाहट" सुनाई दी |
तस्दीक की जाती है,कि मौजूदा दौर की राजनीति में ऐसे दृश्य "दुर्लभ श्रेणी" के होते है,''सादा जीवन-उच्च विचार" की ये पाठशाला,सिर्फ स्मृति ईरानी के आगमन-गंतव्य तक ही सीमित रहेगी,या फिर उनकी रवानगी के बाद "सरकार" फिर वही अपने पुराने "ढर्रे" पर आगे की राह तय करेगी ? यह देखना गौरतलब होगा | स्मृति ईरानी का दो दिवसीय रायपुर प्रवास ने आम कार्यकर्ताओं से लेकर ख़ास पदाधिकारियों को कड़ा सन्देश दिया है|
छत्तीसगढ़ भाजपा की प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी अपने पहले प्रवास के दौरान संगठन को लेकर सख्त अंदाज में नजर आईं। रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे परिसर पहुंचते ही उन्होंने बड़ी संख्या में मौजूद पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की भीड़ पर सवाल उठाए ? उन्होंने साफ़ कहा, कि जिन नेताओं और कार्यकर्ताओं की बैठक निर्धारित है,उन्हें ही तय समय पर कार्यालय बुलाया जाए। बाकी कार्यकर्ता अपने-अपने बूथों पर जाकर संगठन के काम में जुटें। उनके निर्देश के बाद परिसर में अनावश्यक आवाजाही पर रोक लगाई गई। यहां तक कि कई मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के वाहनों को भी परिसर के बाहर ही रोक दिया गया | 
स्मृति ईरानी ने अपने दौरे के पहले दिन सुबह से शाम तक संगठनात्मक बैठकों का सिलसिला जारी रखा। इन बैठको में पार्टी की कार्यप्रणाली, संगठन की मजबूती और भाजपा की रीति-नीति पर चर्चा की गई। बैठक में शामिल होने वाले नेताओं को भी एक साथ प्रवेश देने के बजाय उनके निर्धारित समय के अनुसार बुलाया गया। इस वजह से कई नेताओं को अपनी बारी आने तक कार्यालय के बाहर इंतजार करना पड़ा। परिसर में प्रवेश के दौरान नेताओं के साथ आए लोगों और उनके वाहनों को भी बाहर रोक दिया गया। कार्यक्रम के दौरान ऐसा नज़ारा भी देखने को मिला, जब एक महिला नेत्री ने उनके साथ सेल्फी लेने का प्रयास किया,तो उन्होंने तस्वीर लेने से साफ़ इंकार कर दिया |
छत्तीसगढ़ में ये पहला मौका है,जब प्रधानमंत्री की ''मन की बात'' कार्यक्रम को जमीन पर बैठ कर देखा और सुना गया,इसके पूर्व कार्यक्रम का लुफ़्त कुर्सियों पर बैठकर लिया जाता था | लेकिन,इस बार बीजेपी मुख्यालय का नज़ारा जहाँ बदला-बदला नज़र आया, वही "हुज़ूर" भी बदले मौसम के अनुरूप ख़ुद को ढालते दिखाई दिए| बहरहाल, प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी का यह दौरा सफ़ल और कार्यकर्ताओं के लिए यादगार माना जा रहा है|
