रायपुर। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि प्रदेश में उर्वरक का संकट विकराल रूप ले चुका है। सरकार बताये बिना उर्वरक के खेती कैसे करें किसान। प्रदेश में उर्वरक के लिये मारा मारी शुरू हो गयी है। जुलाई शुरू हो गया है, किसानों को सोसायटी में खाद नहीं मिल रहा है। किसान बराबर सरकार के मंत्रियों, विधायकों, सांसदों से उर्वरक के बारे में गुहार लगा रहे, लेकिन सरकार केवल जुबानी आश्वासन दे रही है। आज भी प्रदेश के आधे से कम सोसायटियों में ही खाद पहुंच पाया है। मानसून आने वाला है, खरीफ में धान की फसल ही राज्य के किसानों की आजीविका का मुख्य आधार है। यदि खरीफ के सीजन में सरकार किसानों को पर्याप्त उर्वरक नहीं दे पायेगी तो किसानों के सामने साल भर के लिये आजीविका का संकट पैदा हो जायेगा।
किसान खाद के लिए भटक रहे है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि खाद का टोकन सिस्टम सरकार ने खत्म किया है। किसानों को खाद के लिए सरकार ने लिमिट समाप्त नहीं किया है। किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद खुले बाजार से भी नहीं मिल रहा है। सोसायटियों में भी किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल रहा है। सरकार सिर्फ कागजी दावा कर रही। किसान खाद के लिए भटक रहे, आज भी सरकार पर्याप्त मात्रा में खाद का भंडारण नहीं कर पाई है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि अभी तक सोसायटियों में खाद का न पहुंचना चिंता पैदा कर रहा। सरकार कब उर्वरक मंगायेगी, कब रैक लगेगी, भवन, सोसायटी पहुंचेगा। पिछले खरीफ सीजन में राज्य के किसानों को 14 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की आवश्यकता थी, साय सरकार शुरू के दो माह तक मात्र 80 हजार मीट्रिक टन ही उर्वरक दे पायी थी, आखिर तक जरूरत से आधे का भी इंतजाम नहीं कर पाई सरकार। किसान यूरिया से लेकर डीएपी और पोटाश सभी के लिए भटकते रहे, बिचौलियों के द्वारा ब्लेक मार्केट में तीन से चार गुने दाम में किसानों को यूरिया और डीएपी खरीदने को मजबूर होना पड़ा था। इस खरीफ सीजन में 15 लाख 55 हजार मीट्रिक टन खाद की आवश्यकता अनुमानित है, पर इस सरकार 50 प्रतिशत स्टाक नहीं जुटा पाई है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि खरीफ सीजन शुरू होने के पहले सरकार का दायित्व है कि वह किसानों के मांग के अनुरूप सोसायटियों में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक पहुंचाएं ताकि किसानों को समय पर खाद उपलब्ध हो सके। सरकार उर्वरकों की उपलब्धता पर श्वेत पत्र जारी करे। पिछली बार की तरह झूठ बोलकर किसानों को गुमराह मत करे। मंत्री की हड़बड़ाहट बता रही है कि इस बार भी केंद्र की सरकार छत्तीसगढ़ के किसानों के हक और अधिकार का उर्वरक देने से आनाकानी कर रही है और दलीय चाटुकारिता में भाजपा के नेता अभी से बहाने तलाश रहे है।
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