भाजपा में जाने को बेताब एक और कांग्रेसी दिग्गज! विधानसभा में सरकार की तारीफ करके सबको चौंकाया

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साल भर से ज्यादा जेल में रहने के बाद रिहा हुए पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा के बयानों ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस के आदिवासी चेहरे के रूप में पहचाने जाने वाले लखमा ने हाल ही में साय सरकार की कार्यशैली की जमकर सराहना की, जिसके बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या वे भाजपा का दामन थाम सकते हैं। छत्तीसगढ़ के राजनीति में इन अटकलों को तब और हवा मिली जब वे विधानसभा बजट सत्र के दौरान भाजपा नेताओं से गले मिलते दिखाई दिए।

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भाजपा नेताओं के गले मिले

शराब घोटाले में फंसे कांग्रेस के दिग्गज नेता कवासी लखमा साल भर जेल में रहने के बाद जब विधानसभा में नजर आए तो कई सीनियर भाजपा नेता उनका स्वागत करते दिखे। भाजपा के सीनियर नेता अजय चंद्राकर बाहें फैलाकर उन्हें गले लगाते दिखे, धर्मजीत सिंह, रामविचार नेताम जैसे भाजपा नेता भी लखमा से मिलते दिखे। इसके बाद कयास लगाए जाने लगे हैं कि क्या कवासी लखमा भाजपा में शामिल हो जाएंगे। एक और बड़ी वजह ये भी हो सकती है कि बीते दिनों सत्तापक्ष के नेताओं ने करप्शन चार्जेस में फंसे कवासी लखमा को उन्हें मोहरा बनाए जाने की बात कही थी जिसका सीधा मतलब ये था कि गुनहगार आप नहीं कोई और है।

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साय सरकार की तारीफ क्यों?

विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार की तारीफ करते हुए लखमा ने कहा कि यदि कोई सरकार जनता के हित में काम करती है तो उसकी सराहना की जानी चाहिए। उन्होंने विधानसभा में खुलकर स्वीकार किया है कि अब बस्तर में लोग शांति से जीने लगे हैं। प्रदेश से नक्सलवाद जैसी दशकों पुरानी बड़ी समस्या का अंत हो रहा है। माना जा रहा है कि यह बयान राजनीतिक संतुलन साधने या अपनी छवि को व्यापक बनाने की रणनीति भी हो सकता है। लेकिन दूसरी ओर भाजपा को बैठे बिठाए कांग्रेस को चिढ़ाने का मौका मिल गया। प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि अब नक्सलियों के अंत बस्तर के विपक्षी नेता भी स्वीकार कर रहे हैं, उस बदलाव को महसूस कर रहे हैं जिसे बस्तर की जनता जी रही है।

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कांग्रेस की प्रतिक्रिया और आगे की राह

कांग्रेस खेमे में भी इन बयानों को लेकर हलचल है। पार्टी के कुछ नेता इसे व्यक्तिगत राय बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक संकेत के रूप में देख रहे हैं। कांग्रेसी नेता इस पर साफ-साफ कुछ भी कहने से बच रहे हैं।  खुद लखमा ने अभी तक भाजपा में शामिल होने की बात पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में स्पष्ट है कि फिलहाल यह मामला सियासी अटकलों और संभावनाओं के दौर में है, और आने वाले समय में ही उनकी राजनीतिक दिशा साफ होगी।

क्या कहते हैं राजनीतिक समीकरण?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लखमा का भाजपा में जाना आसान निर्णय नहीं होगा, क्योंकि वे लंबे समय से कांग्रेस की विचारधारा और संगठन से जुड़े रहे हैं। वे प्रदेश में आदिवासी समाज के प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। दूसरी ओर, भाजपा भी आदिवासी क्षेत्रों में अपना आधार मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में अटकलों को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा सकता, लेकिन अभी तक यह केवल राजनीतिक चर्चाओं तक सीमित है।

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