रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ट्वीट के माध्यम से बस्तर में सुशासन की निर्णायक नीतियों के प्रभाव की जानकारी साझा की है। उन्होंने कहा कि नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025 के अंतर्गत 2800 से अधिक लोगों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए मुख्यधारा में लौटकर विकास और विश्वास की दिशा में कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि यह आंकड़ा स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि विकास और विश्वास की शक्ति किसी भी भटकाव या हिंसा पर भारी पड़ती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब बस्तर में हिंसा की छाया कम होती जा रही है और उसकी जगह संभावनाओं की रोशनी फैल रही है।नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले लोग पुनर्वास कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक सहायता और कौशल विकास जैसी सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं। इससे स्थानीय समाज में स्थिरता और सुरक्षा की भावना भी बढ़ रही है। यह पहल केवल हिंसा को कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से स्थानीय समुदायों को रोजगार और विकास के अवसर उपलब्ध कराकर स्थायी शांति स्थापित की जा रही है।मुख्यमंत्री के ट्वीट ने बस्तर के निवासियों और राज्य सरकार के प्रयासों को सार्वजनिक रूप से मान्यता दी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि सभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र मुख्यधारा में आएं और शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार व सामाजिक सुरक्षा के माध्यम से समृद्धि का हिस्सा बनें। बस्तर में नक्सल समस्या लंबे समय से सुरक्षा और विकास दोनों के लिए चुनौती रही है। राज्य सरकार की इस नीति ने यह दिखा दिया है कि सकारात्मक दृष्टिकोण, विश्वास और सुव्यवस्थित पुनर्वास कार्यक्रम से हिंसा पर नियंत्रण संभव है। मुख्यमंत्री के ट्वीट को स्थानीय प्रशासन और नागरिक समाज द्वारा भी सराहा जा रहा है। इसके साथ ही यह संदेश भी गया है कि राज्य में शांति, सुरक्षा और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने का समय आ गया है।
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