दिल्ली। भारत में लॉकडाउन की अटकलों के बीच भारत सरकार ने साफ किया है कि ऐसी कोई भी योजना नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से संसद में दिए गए भाषण में कोरोना के जिक्र के बाद ऐसी अटकलें लगने लगी थीं। इसके बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई थी कि क्या देश में लॉकडाउन लग सकता है। खास बात है कि साल 2020 में 24 मार्च को ही पीएम मोदी ने कोरोना वायरस महामारी के चलते लॉकडाउन की घोषणा की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बुधवार को सरकार ने पूरे देश में लॉकडाउन की अफवाहों को खारिज कर दिया है। साथ ही साफ किया है कि आम जनता की गतिविधियों या आर्थिक कामों पर किसी तरह की पाबंदी लागू नहीं है। दरअसल, पीएम मोदी ने संसद में कहा था कि देश को कोरोना काल में हुईं परेशानियों की तरह तैयार रहना होगा।पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। साथ ही रसोई गैस बुकिंग नियमों में बदलाव की आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘मैंने सुना है कि गैस सिलेंडर की बुकिंग का अंतराल बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। इसका मतलब है कि आप उससे पहले बुकिंग नहीं कर सकते। अगर रसोई गैस खत्म हो गई तो लोग क्या करेंगे? मुझे उन पर भरोसा नहीं है। हर कोई जानता है कि मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से कीमतें कहां पहुंच गईं हैं।’ उन्होंने कहा, ‘मैं फिर से अलर्ट या लॉकडाउन जैसे उपायों की चर्चा सुन रही हूं। वे जो चाहें करें, मुझे इसकी चिंता नहीं है। अगर हम कोविड से लड़ सकते थे, तो हम फिर से लड़ सकते हैं।’पीएम मोदी ने सोमवार को लोकसभा में युद्ध को लेकर भाषण दिया था। उन्होंने कहा था कि इस संकट का प्रभाव लंबे समय तक रहने वाला है और इसका सामना देशवासियों को कोरोना संकट की तरह ही करना होगा। उन्होंने कहा, ‘इस युद्ध के कारण दुनिया में बने हालात का प्रभाव लंबे समय तक रहने की आशंका है। इसलिए हमें तैयार रहना होगा, हमें एकजुट रहना होगा। हम कोरोना के समय भी एकजुटता से ऐसी चुनौतियों का सामना कर चुके हैं। अब हमें फिर से उसी तरह तैयार रहने की आवश्यकता है। धीरज, संयम और शांत मन से हर चुनौती का मुकाबला करना है।’ खास बात है कि उन्होंने पूरे भाषण में कहीं भी लॉकडाउन शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था। साथ ही सरकार ने देश में किसी भी तरह की सार्वजनिक पाबंदियों का ऐलान नहीं किया था। पीएम मोदी शुक्रवार को चुनाव वाले राज्यों को छोड़कर बाकी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ पश्चिम एशिया संघर्ष के मद्देनजर उनकी तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा के लिए बैठक करेंगे। यह पहली बार है जब प्रधानमंत्री पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे। यह संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के साथ शुरू हुआ था। ईरान ने भी खाड़ी के अपने पड़ोसी देशों और इजराइल पर हमले कर जवाबी कार्रवाई की है।
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