अस्पताल के आईसीयू में भर्ती मजदूर की हालत गंभीर बनी रही और देर शाम इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। गिरने से उनके पैर सहित शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई थीं। घटना के बाद शव को अस्पताल की मरच्यूरी में रख दिया गया है।
इससे पहले नवंबर 2025 में भी देवेंद्र चंद्राकर की इसी तरह काम के दौरान गिरने से मौत हो चुकी है। लगातार हो रही ऐसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि सुरक्षा मानकों के पालन में कहीं न कहीं कमी रह जा रही है।
ठेका श्रमिकों की सुरक्षा पर फोकस जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंचाई पर काम करते समय सेफ्टी बेल्ट, हेलमेट और अन्य सुरक्षा उपकरणों का उपयोग अनिवार्य होता है। इसके साथ ही सुपरवाइजर की मौजूदगी और सुरक्षित कार्य प्रक्रिया (एसडब्ल्यूपी) का सख्ती से पालन जरूरी है। मौजूदा हादसे के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या इन सभी नियमों का सही तरीके से पालन किया जा रहा था।
मजदूर संगठनों और कर्मचारियों के बीच यह चर्चा तेज है कि यदि सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया था, तो हादसा कैसे हुआ। वहीं, यदि लापरवाही हुई है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और ठेका एजेंसी पर कार्रवाई होनी चाहिए।
जांच के बाद तय होगी जवाबदेही
प्रबंधन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अब देखना होगा कि जांच रिपोर्ट में क्या सामने आता है और क्या इस बार जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या नहीं। लगातार हो रहे हादसों के बीच श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।
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