कांकेर। कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर के पास ग्राम चौगेल स्थित पुनर्वास केंद्र एक सकारात्मक बदलाव की मिसाल बनकर उभरा है।
जिन हाथों ने कभी बंदूक उठाकर हिंसा का रास्ता अपनाया था, अब वही हाथ अपने हुनर से काष्ठ कला और अन्य कार्यों में नई पहचान बना रहे हैं।
यहां प्रशिक्षण प्राप्त आत्मसमर्पित नक्सली नेम प्लेट, छत्तीसगढ़ शासन का लोगो, ग्राम पंचायतों के बोर्ड, बच्चों के लिए की-रिंग और सजावटी सामग्री तैयार कर रहे हैं। साथ ही कपड़े के थैले और कार्यालय उपयोगी बैग भी बनाए जा रहे हैं।
राज्य सरकार की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन कांकेर द्वारा यह पहल की जा रही है।
पुनर्वास केंद्र में युवाओं को काष्ठ शिल्प के साथ-साथ इलेक्ट्रिशियन, ड्राइविंग, सिलाई और राजमिस्त्री जैसे व्यावसायिक प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
चौगेल (मुल्ला) कैंप, जो कभी बीएसएफ का ठिकाना था, अब कौशल प्रशिक्षण केंद्र में बदल गया है। यहां 40 आत्मसमर्पित नक्सलियों को विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और मनोरंजन का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। नियमित स्वास्थ्य जांच, खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से उनके सर्वांगीण विकास का प्रयास किया जा रहा है।
कांकेर जिला प्रशिक्षण के बाद रोजगार उपलब्ध कराने वाला प्रदेश का पहला जिला बन गया है। हाल ही में चार युवाओं को निजी क्षेत्र में नौकरी के लिए नियुक्ति पत्र दिए गए, जिनमें सगनूराम आंचला, रोशन नेताम, बीरसिंह मंडावी और संजय नेताम शामिल हैं। इन्हें 15 हजार रुपए मासिक मानदेय के साथ अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी।
यह पहल न केवल पूर्व नक्सलियों के जीवन में बदलाव ला रही है, बल्कि बस्तर क्षेत्र में शांति और विकास की नई राह भी दिखा रही है।
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