दंतेवाड़ा :- नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले के ग्राम छिंदनार में उस वक्त इतिहास रच गया, जब क्रिकेट जगत के दिग्गज सचिन तेंदुलकर अपने पूरे परिवार के साथ यहां पहुंचे। ‘क्रिकेट के भगवान’ कहे जाने वाले सचिन को अपने बीच पाकर पूरा गांव उत्सव के माहौल में डूब गया। ग्रामीणों ने पारंपरिक बस्तरिया नृत्य और भव्य रंगोली के साथ उनका स्वागत किया, जिसे देख सचिन और उनका परिवार मंत्रमुग्ध नजर आया।
सचिन तेंदुलकर का यह दौरा दंतेवाड़ा जैसे संवेदनशील क्षेत्र के लिए सकारात्मकता का संदेश है। सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन द्वारा यहां खेल मैदानों का निर्माण कराया जा रहा है, जिससे स्थानीय युवाओं और बच्चों को खेल की मुख्यधारा से जुड़ने का बड़ा अवसर मिलेगा। यह दौरा बस्तर की बदलती तस्वीर और शांति की ओर बढ़ते कदमों को दर्शाता है।
मैदान पर दिखा सचिन का देसी अंदाज
कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते ही सचिन तेंदुलकर ने ग्रामीण संस्कृति का आनंद लिया। उन्होंने वहां मौजूद छोटी बच्चियों के साथ रस्साकशी (Tug of War) का खेल खेला। इसके बाद वे वॉलीबॉल के मैदान में भी उतरे और बच्चों के साथ हाथ आजमाए। अपने पसंदीदा खिलाड़ी को खेलता देख बच्चों और युवाओं का उत्साह चरम पर था।
नन्ही सुमन को मिला सचिन से सम्मान
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय बच्ची सुमन यादव को सचिन तेंदुलकर के हाथों पुरस्कार प्राप्त हुआ। भावुक होते हुए सुमन ने कहा, “यह मेरे लिए गर्व की बात है कि सचिन सर ने हमारे साथ वॉलीबॉल खेला और मुझे प्रोत्साहित किया। यह पल मैं जिंदगी भर याद रखूंगी।”
सचिन फाउंडेशन का खेल अभियान
सचिन तेंदुलकर के इस दौरे के पीछे खेलों को बढ़ावा देने का बड़ा उद्देश्य है। फाउंडेशन के कर्मचारियों ने बताया कि क्षेत्र में अब तक 25 खेल मैदानों का निर्माण पूरा हो चुका है और आने वाले समय में कई और मैदान तैयार किए जा रहे हैं। कर्मचारियों ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि फाउंडेशन के इस प्रोजेक्ट की वजह से ही उन्हें इतने बड़े खिलाड़ी से मिलने का सौभाग्य मिला।
मुख्य तथ्य
स्थान: ग्राम छिंदनार, जिला दंतेवाड़ा।
प्रमुख गतिविधियां: बस्तरिया नृत्य, रस्साकशी, वॉलीबॉल और रंगोली अवलोकन।
सुरक्षा: पुलिस प्रशासन द्वारा कड़े सुरक्षा इंतजाम, अतिरिक्त बल तैनात।
उपलब्धि: क्षेत्र में 25 खेल मैदानों का निर्माण पूर्ण।
सचिन तेंदुलकर के इस दौरे के बाद दंतेवाड़ा और बस्तर के अन्य क्षेत्रों में खेल सुविधाओं के विस्तार में तेजी आने की उम्मीद है। फाउंडेशन के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को निखारने के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित किए जा सकते हैं, जिससे बस्तर के बच्चे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकें।
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