रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) की जांच ने बड़े खुलासे किए हैं।
EOW ने रायपुर–विशाखापट्टनम प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर के भू-अर्जन मामलों में 3 पटवारियों के खिलाफ पहला पूरक चालान कोर्ट में पेश किया है। जांच में सामने आया है कि इन पटवारियों ने भू-माफियाओं के साथ मिलकर सरकारी जमीन को निजी बताकर करीब 40 करोड़ रुपए का अवैध मुआवजा दिलाया।
EOW के मुताबिक मूल खसरों के दस्तावेजों में जानबूझकर हेरफेर की गई। सरकारी भूमि को दोबारा निजी भूमि दर्शाया गया, निजी जमीनों के लिए फर्जी मुआवजा प्रकरण बनाए गए और बैकडेट में खाता बंटवारा व नामांतरण के जाली दस्तावेज तैयार किए गए। यह पूरा षड्यंत्र रायपुर-विशाखापट्टनम भारतमाला कॉरिडोर के भू-अर्जन के दौरान रचा गया।
इस मामले में दिनेश पटेल, लेखराम देवांगन और बसंती घृतलहरे को 29 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। इनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और IPC की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज है। 24 जनवरी 2026 को कोर्ट में पूरक चालान दाखिल किया गया।
गौरतलब है कि भारतमाला घोटाले की जांच के दौरान EOW ने SDM, तहसीलदार, पटवारी और राजस्व अधिकारियों समेत 17 से 20 ठिकानों पर छापेमारी की थी। जांच में बैकडेट दस्तावेजों और करोड़ों की गड़बड़ी की पुष्टि हुई है, जिससे राज्य में प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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