वार्डवासियों ने बताया कि यह केमिकल फैक्ट्री करीब 30 वर्षों से बंद पड़ी हुई है। फैक्ट्री में पहले दवाइयों का निर्माण किया जाता था। लंबे समय से बंद होने के कारण भवन अब खंडहर में तब्दील हो चुके हैं और परिसर की चारदीवारी भी कई जगहों से टूट चुकी है। फैक्ट्री परिसर में वर्षों से केमिकल वेस्ट का बड़ा ढेर पड़ा हुआ है। अब इस वेस्ट मटेरियल के भीतर लगातार आग धधक रही है। स्थानीय लोगों का दावा है कि करीब 4 हजार वर्ग फीट क्षेत्र इसकी चपेट में है। जमीन के भीतर अंगारे जैसे हालात दिखाई दे रहे हैं और कई जगहों से गर्म धुआं व भाप निकलती रहती है। खुले पड़े परिसर के कारण आसपास के बच्चे वहां खेलने पहुंच जाते हैं। खेलते-खेलते बच्चे जमीन के भीतर धधक रही आग पर पहुंच जाते हैं, जिससे उनके पैर बुरी तरह झुलस रहे हैं। वार्डवासियों के मुताबिक अब तक चार बच्चों के पैर गंभीर रूप से जल चुके हैं। घायलों का इलाज अस्पताल में जारी है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की, तो बड़ा हादसा हो सकता है।
स्थानीय निवासी गणेश ने आरोप लगाया कि मामले की जानकारी कई बार प्रशासन को दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। फैक्ट्री परिसर चारों ओर से खुला होने के कारण लगातार दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। वार्डवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि फैक्ट्री परिसर को तत्काल सील किया जाए, धधक रहे केमिकल वेस्ट को हटाया जाए और क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
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