सहकार से समृद्धि की ओर : नवा रायपुर में 6 राज्यों की क्षेत्रीय सहकारिता कार्यशाला संपन्न

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रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “सहकार से समृद्धि” की संकल्पना को धरातल पर उतारने के लिए केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय द्वारा नवा रायपुर में पूर्वी क्षेत्र के छह राज्यों की एक दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुई। सचिव डॉ. भूटानी ने की अध्यक्षता कार्यशाला की अध्यक्षता केन्द्रीय सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने की। इसमें सहकारिता क्षेत्र को आधुनिक, आत्मनिर्भर और रोजगारोन्मुख बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। बिहार, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ अधिकारी कार्यशाला में शामिल हुए। , ट्रैफिक नियम का किया था उल्लंघन यह कार्यशाला ग्रामीण विकास, किसानों की आय वृद्धि और सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। सहकारिता आधारित योजनाओं से गांवों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा किसान, पशुपालक और मत्स्य पालक आत्मनिर्भर बनेंगे। केंद्रीय योजनाओं की हुई समीक्षा बैठक में केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह की पहल पर संचालित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। सहकारी संस्थाओं को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनाने की रणनीति पर विचार-विमर्श हुआ।  को बहुउद्देशीय बनाने पर जोर डेयरी, मत्स्य एवं बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) के गठन और सुदृढ़ीकरण पर विशेष जोर दिया गया। देशभर में 2 लाख नई डेयरी, मत्स्य एवं बहुउद्देशीय पैक्स समितियों के गठन की दिशा में हो रही प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही विश्व की सबसे बड़ी सहकारी अनाज भंडारण योजना के क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि पैक्स समितियों को केवल ऋण वितरण तक सीमित न रखकर बहुउद्देशीय ग्रामीण सेवा केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके तहत खाद-बीज वितरण, धान खरीदी, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, डेयरी, मत्स्य पालन, वेयरहाउसिंग और ग्रामीण उद्यमिता जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे किसानों और ग्रामीणों को गांव स्तर पर ही बेहतर सुविधाएं और रोजगार के अवसर मिलेंगे। व्यवसायिक विस्तार पर मंथन कार्यशाला में पैक्स समितियों के बिजनेस डायवर्सिफिकेशन यानी व्यवसायिक विस्तार पर सार्थक चर्चा हुई। अधिकारियों ने पैक्स समितियों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने पर गहन मंथन किया, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सके।

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