इसके अलावा बच्चों की शिक्षा और हॉस्टल से जुड़े भत्तों में बड़ा इजाफा किया गया है, जहां एजुकेशन अलाउंस 100 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह प्रति बच्चा (अधिकतम दो बच्चों तक) कर दिया गया है और हॉस्टल अलाउंस 300 रुपये से बढ़ाकर 9000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है।
वहीं कंपनी द्वारा दी जाने वाली कार और उसके उपयोग पर टैक्स वैल्यूएशन के नियमों में भी संशोधन किया गया है, जिसमें इंजन क्षमता के आधार पर अलग-अलग मासिक टैक्स कैलकुलेशन तय किया गया है। नए नियमों में घरेलू सेवाओं और अन्य सुविधाओं पर भी टैक्स से जुड़े प्रावधान अपडेट किए गए हैं, जिससे कर्मचारियों को मिलने वाले कई बेनिफिट्स अब टैक्स के दायरे में आ सकते हैं।
कुल मिलाकर, यह नया टैक्स ढांचा सैलरी स्ट्रक्चर, अलाउंस और बेनिफिट्स को लेकर स्पष्टता लाएगा, लेकिन साथ ही कई लोगों के लिए टैक्स बोझ भी बढ़ा सकता है, ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि 1 अप्रैल से पहले ही अपने टैक्स प्लान की समीक्षा करना जरूरी होगा ताकि नए नियमों के अनुसार सही विकल्प चुना जा सके।
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