00 हजारों लोग उठा रहे हैं शून्य बिजली बिल का लाभ
रायपुर। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत स्थापित किए जा रहे सोलर रूफटॉप संयंत्रों के रख-रखाव में खर्च को लेकर कुछ भ्रांतियां सामने आई हैं, जबकि वस्तुस्थिति में ऐसी कोई समस्या नहीं है। 3 किलोवॉट तक तो बैटरी की जरूरत ही नहीं है। वेंडर्स द्वारा 3 किलोवॉट से अधिक क्षमता के उपभोक्ताओं को 5 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक लंबी वारंटी बैटरी के लिए दी जा रही है। वेंडर्स को 5 वर्ष तक वार्षिक रख-रखाव अनुबंध के तहत सेवा देनी होगी। सोलर पैनल की सफाई के लिए कोई विशेष तकनीकी आवश्यक नहीं है। धूल जमने पर इसे सामान्य पानी से साफ किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत लगाए जाने वाले सोलर रूफटॉप संयंत्र को लेकर एक भ्रामक प्रचार प्रकाश में आया है कि इसमें जितनी राशि का बिजली बिल माफ होता है उससे अधिक खर्च इसके रख-रखाव में हो जाता है। छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के विशेषज्ञों के अनुसार यह धारणा पूर्णत: गलत है। वास्तव में 3 किलोवॉट तक के संयंत्रों से 300 यूनिट नि:शुल्क बिजली प्राप्त होने की बात ही सही है। हजारों उपभोक्ता इस योजना के माध्यम से अपना बिजली बिल शून्य करने में सफल हुए हैं। इसके अलावा केंद्र और राज्य शासन द्वारा सब्सिडी प्रदान किए जाने एवं 6 प्रतिशत की ब्याज दर पर बैंक ऋण दिए जाने से रूफटॉप सोलर पॉवर प्लांट लगाने का काम काफी किफायती हो गया है। जहां तक बैटरी की खराबी और उसके रख-रखाव का विषय है तो वास्तविकता यह है कि 3 किलोवॉट तक के संयंत्रों के लिए ऑन-ग्रिड प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें बैटरी की आवश्यकता ही नहीं होती। अत: बैटरी बदलने या बैटरी संबंधी रख-रखाव का सवाल ही पैदा नहीं होता।
यदि कोई उपभोक्ता ‘हाइब्रिडÓ सिस्टम का चयन करता है, तो वर्तमान में उपलब्ध आधुनिक लिथियम-आयन बैटरियों की तकनीक अत्यंत उन्नत है। इन बैटरियों का चार्जिंग-डिस्चार्जिंग चक्र लगभग 6,000 तक है, जो कि अत्यंत विश्वसनीय है। इसके साथ ही कंपनियां बैटरी पर 5 से 10 वर्ष तक की लंबी वारंटी प्रदान कर रही हैं। योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार वेंडर-संस्थापनकर्ता को 5 वर्ष का वार्षिक रख-रखाव अनुबंध प्रदान करना अनिवार्य है। अत: 5 वर्षों तक उपभोक्ता पर रख-रखाव का कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आता है। कुछ लोगों द्वारा वर्ष 2019 के एक उदाहरण को उल्लेखित किया जाता है, जबकि पीएम सूर्यघर योजना 13 फरवरी 2024 को नवीनतम और कड़े तकनीकी मानकों के साथ शुरू की गई है। पुराने और अप्रचलित उदाहरणों के आधार पर वर्तमान योजना की गुणवत्ता पर प्रश्न उठाना अनुचित एवं भ्रामक है। धूल के कारण उत्पादन में कमी एक आना और सामान्य सफाई से इसका उपचार एक बहुत सामान्य प्रक्रिया है, जिसमें सामान्य पानी से सफाई कर ठीक किया जा सकता है। इसे एक बड़ी तकनीकी विफलता या भारी खर्च के रूप में प्रस्तुत करना अतिश्योक्तिपूर्ण है।
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