सम्राट चौधरी होंगे बिहार के नए CM, BJP विधायक दल की बैठक में लगी मुहर, कल लेंगे शपथ

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पटना: सम्राट चौधरी बिहार के नए CM होंगे. उन्हें बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया है. कल 15 अप्रैल को लोकभवन में शपथग्रहण समारोह होगा. आज नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा दे दिया. वे सम्राट चौधरी और विजय चौधरी के साथ एक ही गाड़ी से राजभवन पहुंचे और राज्यपाल को इस्तीफा सौंपा. इस्तीफे के बाद उन्होंने X पर लिखा- ‘अब नई सरकार यहां का काम देखेगी. नई सरकार को मेरा पूरा सहयोग रहेगा. आगे भी बहुत अच्छा काम होगा, बिहार बहुत आगे बढ़ेगा. ‘

सम्राट चौधरी न राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पाठशाला से निकले हैं और न ही बीजेपी से अपनी सियासी पारी की आगाज किया है. इसके बाद भी बीजेपी की मिट्टी में सम्राट इस तरह फले फूले के बिहार के चौधरी बनकर उभरे हैं.
राबड़ी देवी की आरजेडी सरकार में सम्राट सबसे युवा मंत्री रहे तो मांझी की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने, लेकिन सियासी बुलंदी बीजेपी में मिली. बीजेपी में आए हुए सम्राट चौधरी को सिर्फ 8 साल ही हुए हैं, लेकिन राजनीतिक पिच पर उन्होंने तमाम दिग्गज नेताओं को पीछे छोड़ दिया है.
सम्राट चौधरी को सियासत अपने पिता शकुनी चौधरी से विरासत में मिली है. शकुनी चौधरी बिहार की राजनीति के दिग्गज नेता रहे हैं, जो कांग्रेस से लेकर समता पार्टी और आरजेडी तक में रहे. विधायक से लेकर सांसद तक का सफर तय किया, बिहार की सियासत में ओबीसी चेहरा माने जाते थे. सम्राट चौधरी अपने पिता शकुनी चौधरी के राजनीतिक ताकत के सहारे सियासी पिच पर उतरे और फिर पलटकर नहीं देखा.
सम्राट चौधरी (राकेश कुमार) बिहार की राजनीति में एक प्रमुख भाजपा नेता हैं, जिन्होंने 1990 के दशक में आरजेडी से अपने सियासी सफर की शुरुआत की. दिग्गज नेता शकुनी चौधरी के बेटे, सम्राट 19 साल की उम्र में मंत्री बने थे. 1999 में राबड़ी देवी सरकार में सबसे युवा मंत्रियों में से एक बने, उनके पिता समता पार्टी छोड़कर लालू यादव के साथ आए थे. इसके बदले में लालू ने सम्राट चौधरी को एमएलसी बनाकर मंत्री बनाया था, लेकिन उम्र को लेकर सियासी विवाद छिड़ा, जिसके बाद उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था.
सम्राट चौधरी ने आरजेडी छोड़कर जेडीयू में शामिल हो गए. 2014 में नीतीश कुमार ने सीएम पद छोड़ा तो जीतनराम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया गया था. सम्राट चौधरी बिहार में मांझी सरकार में कैबिनेट मंत्री बने. मांझी के बाद नीतीश दोबारा से सीएम बने तो सम्राट चौधरी को कैबिनेट में जगह नहीं मिल सकी. जेडीयू में बहुत ज्यादा राजनीतिक तवज्जे नहीं मिलने से सम्राट कुमार का नीतीश कुमार से सियासी मोहभंग हो गया, जिसके चलते उन्होंने जेडीयू को अलविदा कह दिया.
जेडीयू छोड़ने के बाद सम्राट चौधरी ने साल 2018 में बीजेपी का दामन थाम लिया. सम्राट चौधरी भले ही कई दलों से होते हुए बीजेपी में आए हों, लेकिन उन्हें सियासी बुलंदी बीजेपी में ही मिली है. बीजेपी की मिट्टी में खूब फले फूले. 2017 में सम्राट चौधरी बीजेपी में एंट्री करते हैं और आज प्रदेश भाजपा के नंबर वन पोजीशन पर विराजमान हो गए. 2019 में नित्यानंद राय जब प्रदेश अध्यक्ष थे तो सम्राट चौधरी को उपाध्यक्ष बनाया गया.
सम्राट चौधरी बीजेपी में शामिल हुए तो उस वक़्त एनडीए की सरकार में उन्हें पंचायती राज मंत्री भी बनाया गया था. 2020 में बीजेपी से विधान परिषद पहुंचते हैं. अगस्त 2022 में जब नीतीश कुमार ने बीजेपी से नाता तोड़कर आरजेडी के साथ महागठबंधन सरकार बनाई थी, तब सम्राट चौधरी को सियासी पहचान मिली. सम्राट चौधरी विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष बने. साल 2023 में सम्राट चौधरी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बने और इसके बाद नीतीश कुमार दोबारा से एनडीए में वापसी की तो डिप्टीसीएम की कुर्सी सौंप दी गई.
2025 के विधानसभा चुनाव में विपक्षी दलों के के निशाने पर सबसे ज्यादा सम्राट चौधरी की रहे, जिसका नतीजा था कि एनडीए की वापसी हुई तो फिर डिप्टीसीएम बनाए गए. अब मुख्यमंत्री की कुर्सी चंद कदम दूर रह गई है. बीजेपी उनके कोइरी समाज के सियासी ताकत को देखते हुए राजनीतिक अहमियत देने का काम किया.

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