नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि कोई भी होमबायर सिर्फ इस वजह से उपभोक्ता नहीं माना जाना बंद नहीं करता कि उसने अपनी खरीदी गई संपत्ति को किराए पर दे दिया है।
जस्टिस पी. के. मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ ने 4 फरवरी को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें गुरुग्राम में फ्लैट खरीदने वाले व्यक्ति की शिकायत यह कहकर खारिज कर दी गई थी कि फ्लैट किराए पर होने से वह कॉमर्शियल उपयोग में है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल किराए पर देना यह साबित नहीं करता कि संपत्ति व्यावसायिक उद्देश्य से खरीदी गई थी और ऐसे मामलों में यह साबित करने की जिम्मेदारी बिल्डर की होती है, न कि होमबायर की।
कोर्ट ने साफ किया कि हर मामला उसके तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर तय होगा और जब तक कॉमर्शियल उद्देश्य साबित न हो, तब तक खरीदार को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत उपभोक्ता ही माना जाएगा। अब यह मामला दोबारा विचार के लिए NCDRC को भेज दिया गया है।
Author Profile
Latest entries
Big breakingJuly 3, 2026लोक निर्माण विभाग के सचिव ने पुल निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की
Big breakingJuly 3, 2026“सशक्त गांव से साकार होगा विकसित भारत का सपना”-मंत्री अग्रवाल
Big breakingJuly 3, 2026प्रदेश में मानसून के दस्तक के साथ ही खेती-किसानी में तेजी, राज्य में 6.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लक्ष्य का 13 प्रतिशत बोनी पूर्ण
Big breakingJuly 3, 2026मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मेधावी विद्यार्थियों का किया सम्मान
