दुर्ग। छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। दुर्ग और भिलाई में स्वाइन फ्लू के दो नए मरीज मिलने से चिंता बढ़ी है। दोनों मरीजों की उम्र करीब 45 से 50 वर्ष के बीच बताई जा रही है। इससे पहले दुर्ग में करीब तीन साल की बच्ची में H1N1 संक्रमण की पुष्टि हुई थी। ताजा जानकारी के मुताबिक दुर्ग जिले में अब तक स्वाइन फ्लू के तीन मरीज सामने आ चुके हैं।
इनमें से एक मरीज का अस्पताल में इलाज जारी है, जबकि स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमण की रोकथाम के लिए निगरानी बढ़ा दी है। बच्चों और बुजुर्गों को संक्रमण का अधिक जोखिम होने के कारण विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
प्रदेश में कितने मामले?
25 अगस्त की उपलब्ध रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ में दो पुष्ट H1N1 मामले बताए गए थे—एक रायपुर और एक दुर्ग में। इसके बाद 26 अगस्त को दुर्ग-भिलाई में दो नए मरीज सामने आने की रिपोर्ट है। हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों को लेकर अंतर दिखाई दे रहा है, इसलिए राज्य का आधिकारिक कुल आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग की ताजा बुलेटिन से ही निश्चित माना जाना चाहिए।
कैसे फैलता है स्वाइन फ्लू?
स्वाइन फ्लू H1N1 वायरस से होने वाला इन्फ्लूएंजा संक्रमण है। यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बोलने के दौरान निकलने वाली संक्रमित बूंदों के संपर्क में आने से फैल सकता है। संक्रमित सतह को छूने के बाद बिना हाथ धोए नाक, मुंह या आंखों को छूने से भी संक्रमण का खतरा रहता है।
क्या हैं इसके लक्षण?
स्वाइन फ्लू में आमतौर पर बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, बदन दर्द और थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मामलों में सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है। हालांकि केवल इन लक्षणों के आधार पर स्वाइन फ्लू की पुष्टि नहीं की जा सकती; जांच के बाद ही संक्रमण की पुष्टि होती है।
बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा सावधानी की जरूरत
डॉक्टरों के मुताबिक छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और कमजोर इम्युनिटी या पहले से गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने संक्रमित व्यक्ति से दूरी रखने, हाथों की साफ-सफाई का ध्यान रखने, खांसते-छींकते समय मुंह ढकने और जरूरत पड़ने पर मास्क का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील
स्वास्थ्य विभाग की अपील है कि बुखार, लगातार खांसी या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और चिकित्सकीय सलाह लें। वहीं, बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने से बचने की भी सलाह दी गई है।
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