रायपुर। छत्तीसगढ़ में राज्य पुलिस सेवा (SPS) के अधिकारियों के लिए पदोन्नति की राह बेहद पथरीली और लंबी साबित हो रही है। जहां अन्य राज्यों में पुलिस अधिकारी कम समय में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) का पद हासिल कर रहे हैं, वहीं छत्तीसगढ़ इस मामले में देश में 19वें स्थान पर पिछड़ गया है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में वर्ष 2002 बैच के अधिकारियों को 23 साल की लंबी सेवा के बाद अब जाकर आईपीएस अवार्ड किया गया है। इसके विपरीत, देश के अन्य राज्यों में स्थिति कहीं बेहतर है।
कर्नाटक में 2012, गुजरात और केरल में 2011, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और सिक्किम में 2010 बैच के अधिकारी प्रमोट हो रहे है। हैरानी की बात यह है कि राज्य के भीतर ही प्रशासनिक सेवा (IAS) के अफसरों को महज 13 साल में प्रमोशन मिल रहा है, जबकि पुलिस विभाग में यह प्रक्रिया कछुआ गति से चल रही है।
कैडर रिव्यू और खाली पदों का पेंच
राज्य में आईपीएस के कुल 153 पद स्वीकृत हैं, लेकिन यह संख्या राज्य की जरूरतों के हिसाब से काफी कम है।
हर पांच साल में रिव्यू ना होने, नए जिलों में आईपीएस पद अधिसूचित ना करने, कमिश्नर सिस्टम में सभी पद मंजूर ना होने से अधिकारी नाराज है। नाराज अधिकारियों ने सरकार को पत्र लिखकर कम से कम 60 नए आईपीएस पद बढ़ाने की मांग की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक समय पर विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठकें नहीं होंगी और कैडर रिव्यू का प्रस्ताव केंद्र से मंजूर नहीं कराया जाएगा, तब तक राज्य पुलिस का मनोबल प्रभावित होता रहेगा।
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