स्वतंत्र छत्तीसगढ़ डेस्क हाइलाइट्स:
- सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में बड़ा हादसा
- अब तक 20 मजदूरों की मौत, 15 घायल, इलाज जारी
- कंपनी चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत 10 लोगों पर FIR दर्ज
- मशीनों के रखरखाव में लापरवाही आई सामने
- मृतकों के परिजनों को 35-35 लाख मुआवजा और नौकरी का ऐलान
हादसे के बाद बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित सिंघीतराई वेदांता पावर प्लांट हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। इस दर्दनाक घटना में अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 15 घायल मजदूरों का अस्पताल में इलाज जारी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई की गई और कंपनी के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
FIR में कौन-कौन शामिल, किन धाराओं में केस
पुलिस ने कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, प्रबंधक देवेंद्र पटेल समेत कुल 10 जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को आरोपी बनाया है। थाना डभरा में अपराध क्रमांक 119/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1), 289 और 3(5) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई हादसे में संभावित लापरवाही और जिम्मेदारी तय करने की दिशा में अहम मानी जा रही
जांच में सामने आई लापरवाही
प्रारंभिक पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि वेदांता कंपनी और एनजीएसएल (NGSL) द्वारा मशीनरी और उपकरणों के रखरखाव में गंभीर लापरवाही बरती गई। निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण बायलर के दबाव में अचानक उतार-चढ़ाव हुआ और यह भयावह हादसा हो गया। यह लापरवाही सीधे तौर पर मजदूरों की जान पर भारी पड़ी।
जांच के लिए विशेष टीम गठित
मामले की गहराई से जांच के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया है। इस टीम में एसडीओपी सुमित गुप्ता, फोरेंसिक अधिकारी सृष्टि सिंह और थाना प्रभारी राजेश पटेल शामिल हैं। टीम तकनीकी और फोरेंसिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
मुआवजा और सहायता की घोषणा
हादसे के बाद कंपनी प्रबंधन ने मृतक मजदूरों के परिजनों को 35-35 लाख रुपये मुआवजा देने और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की घोषणा की है। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार ने भी आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया है। हालांकि, पीड़ित परिवारों के लिए यह राहत उनके अपनों की कमी को पूरा नहीं कर सकती, लेकिन प्रशासनिक मदद से कुछ सहारा जरूर मिल सकेगा।
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