बारामती/पुणे: महाराष्ट्र की राजनीति (Maharashtra Politics) के एक युग का गुरुवार को बारामती (Baramati) में भावुक अंत हो गया. उपमुख्यमंत्री (Maharashtra Deputy Chief Minister) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दिग्गज नेता अजित पवार (Ajit Pawar) का अंतिम संस्कार (Funeral) पूरे राजकीय सम्मान के साथ विद्या प्रतिष्ठान ग्राउंड में संपन्न हुआ. उनके दोनों बेटों, पार्थ और जय पवार (Parth And Jay Pawar) ने मिलकर अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी. इस दौरान पूरा बारामती ‘अजित दादा अमर रहे’ के नारों से गूंज उठा.
बुधवार को हुए दर्दनाक विमान हादसे के बाद राज्य में घोषित तीन दिवसीय राजकीय शोक के बीच, गुरुवार सुबह 11:30 बजे के करीब विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई.
अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
अजित पवार की अंतिम यात्रा सुबह उनके पैतृक आवास ‘काटेवाडी’ से शुरू हुई. फूलों से सजे वाहन में उनके पार्थिव शरीर को जब बारामती की सड़कों से ले जाया गया, तो हजारों समर्थकों का हुजूम उमड़ पड़ा. लोग अपने नेता की एक झलक पाने के लिए छतों और पेड़ों पर चढ़े नजर आए। बारामती के चप्पे-चप्पे पर केवल ‘अजित दादा, परत या’ (अजित दादा, वापस आ जाओ) की गूंज सुनाई दे रही थी.
देश के शीर्ष नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
अजित पवार को अंतिम विदाई देने के लिए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देश के कई दिग्गज नेता बारामती पहुंचे:
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- केंद्र सरकार: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी.
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- महाराष्ट्र सरकार: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, और पंकजा मुंडे सहित पूरी कैबिनेट अंतिम संस्कार में शामिल हुई.
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- विपक्षी नेता: शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे और मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने भी परिवार से मुलाकात कर सांत्वना दी.
- पवार परिवार: शरद पवार, सुप्रिया सुले और रोहित पवार पूरे समय परिवार के साथ खड़े नजर आए. गोवा के सीएम प्रमोद सावंत भी अंतिम विदाई देने पहुंचे.
राजकीय सम्मान और विदाई की रस्में
अंतिम संस्कार से पहले महाराष्ट्र पुलिस के दस्ते ने अजित पवार को बंदूकों की सलामी (Gun Salute) दी. तिरंगे में लिपटे उनके पार्थिव शरीर से ध्वज हटाकर पूरे सम्मान के साथ उनके बेटे जय पवार को सौंपा गया. इसके बाद ब्राह्मणों के मंत्रोच्चार के बीच अंतिम संस्कार की रस्में निभाई गईं.
शोक में डूबा महाराष्ट्र
अजित पवार के निधन से महाराष्ट्र में गहरा राजनीतिक शून्य पैदा हो गया है. प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से 3,000 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए थे, फिर भी भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो रहा था. बारामती के स्थानीय लोगों के लिए यह एक व्यक्तिगत क्षति है, क्योंकि वे अजित पवार को अपने रक्षक और विकास पुरुष के रूप में देखते थे.
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