बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2003 रामावतार जग्गी हत्याकांड में बिलासपुर हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए बड़ा उलटफेर कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने सीबीआई की अपील स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट के 2007 के फैसले को पलट दिया और तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को हत्या (धारा 302) और आपराधिक साजिश (धारा 120-बी) का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही 1000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि एक ही गवाही के आधार पर कुछ आरोपियों को दोषी ठहराना और मुख्य साजिशकर्ता को बरी करना कानूनन गलत और असंगत था। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दोबारा खोला गया था, जिसके बाद हाईकोर्ट में इसकी सुनवाई हुई।
गौरतलब है कि 4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस केस में कुल 31 आरोपी बनाए गए थे, जिनमें से 28 को पहले ही सजा मिल चुकी थी, जबकि अमित जोगी को 2007 में सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था। बाद में जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिसके बाद मामला फिर से हाईकोर्ट पहुंचा।
रामावतार जग्गी कारोबारी पृष्ठभूमि के साथ-साथ राजनीति में भी सक्रिय थे और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे। इस फैसले के बाद एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और 22 साल पुराने इस हत्याकांड को लेकर न्याय मिलने की चर्चा जोरों पर है।
Author Profile
Latest entries
Big breakingApril 6, 2026BIG BREAKING : 22 साल बाद पलटा फैसला, अमित जोगी दोषी करार—जग्गी हत्याकांड में उम्रकैद
Big breakingApril 6, 2026राज्यपाल रमेन डेका आज करेंगे एंबुलेंस सेवा का शुभारंभ, स्थानीय लोगों को मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा
ChhattisgarhApril 6, 2026BJP का 47 स्थापना दिवस आज, शुरू होगा गांव चलो अभियान, हजारों कार्यकर्ता होंगे एकजुट
Big breakingApril 6, 2026CRIME : जंगल में मिली युवक की लाश, गला रेतकर की गई बेरहम हत्या से सनसनी
