रायपुर । छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने अध्यक्ष राजीव गुप्ता, सचिव मोती जैन ने शनिवार को पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए कहा कि इस वर्ष प्रदेश के 6000 से ऊपर निजी स्कूल जिनमे शिक्षा के अधिकार कानून के तहत इसी माह से प्रवेश प्रस्तावित है। ये सभी लॉटरी के माध्यम से आने वाले विद्यार्थियों की एडमिशन की प्रक्रिया में सहयोग न करते हुए चयनित विद्यार्थियों को प्रवेश भी नहीं देंगे।
उन्होंने बताया कि आर.टी.ई. में पहली बार 2011 से ही कक्षा पहली से पांचवी तक की प्रतिपूर्ति राशि 7000/-, छठवीं से आठवीं तक 11400/- प्रति विद्यार्थी /प्रति वर्ष तय की गई थी। राज्य सरकार ने 2018 में कक्षा नवमी से बारहवी को दायरे में लाया गया एवं राशि 15000/- प्रति विद्यार्थी / प्रति वर्ष तय की। 2011 के बाद से प्रतिपूर्ति राशि अभी तक नहीं बढ़ाई गई है। राशि बढ़ाने की मांग संगठन 2016 से लगातार कर रहा है। इसकी अनदेखी पर जुलाई 2025 में संगठन की याचिका पर उच्च न्यायालय बिलासपुर ने 19 सितंबर 25 को 6 महीने के अंदर संगठन द्वारा दी गई रिप्रेजेंटेशन पर निर्णय हेतु आदेशित किया । उसके बाद पिछले 6 महीना से विभाग अनदेखी से 1 मार्च विभाग के किसी पत्र / नोटिस का जवाव नहीं दे रहे हैं। राशि इतनी कम है की सभी विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
अन्य प्रदेशों में प्रतिपूर्ति राशि यहां से बहुत ज्यादा है। जैसे असम-16396, चंडीगढ़-28176, गुजरात- 13000, हिमाचल प्रदेश 34744, कर्नाटक-8000 एवं 16000, महाराष्ट्र – 17670, उड़ीसा 21247, राजस्थान 10688, तमिलनाडु -11700, उत्तराखंड-16596, छत्तीसगढ़ से कम प्रतिपूर्ति राशि सिर्फ तीन प्रदेश बिहार, उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश की है।
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